Published on: 08 Apr 2026
*आईजीयू में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ शुभारंभ। स्वदेशी सोच और आत्मनिर्भरता का संदेश देकर श्री सतीश जी ने विद्यार्थियों को किया प्रेरित।*
इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय, मीरपुर, रेवाड़ी के कौशल संवर्धन और व्यावसायिक विकास केंद्र, वाणिज्य विभाग, पर्यटन एवं प्रबंधन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में स्वदेशी शोध संस्थान के सहयोग से दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य Vision 2047 के तहत आत्मनिर्भर, समृद्ध एवं सतत भारत के निर्माण हेतु नए विचार, नीतिगत सुझाव एवं व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करना है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में श्री सतीश जी, सह-संघटक, स्वदेशी जागरण मंच तथा विशिष्ट अतिथि श्री दीपक जैन, अध्यक्ष, एफआईआई, श्री रवि गुप्ता, निदेशक, बीएमजी उपस्थित रहे। अंतरराष्ट्रीय वक्ता के रूप में नॉर्वे के एगडर विश्वविद्यालय से प्रोफेसर मोहन कोल्हे ऑनलाइन माध्यम से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी ने मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि का फूलों के गुलदस्ते से स्वागत किया एवं स्मृति चिन्ह व शाल भेंट कर सम्मानित किया। सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि द्वारा मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्वलित कर विश्वविद्यालय कुलगीत के द्वारा किया गया।
अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले प्रोफेसर सुनील कुमार ने अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कार्यक्रम की रूपरेखा को विस्तार पूर्वक बताया।
मुख्य वक्ता श्री सतीश जी ने विश्वविद्यालय प्रशासन एवं उनकी टीम को अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने के लिए बधाई दी और निरंतर ऐसे प्रेरणा स्रोत एवं शोध परक सम्मेलनों को आयोजित करने के लिए सुझाव दिए। उन्होंने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को स्वदेशी सोच, आत्मनिर्भरता और नवाचार की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आज के समय में भारत को वैश्विक स्तर पर सशक्त बनाने के लिए युवाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दें, स्थानीय संसाधनों का अधिकतम उपयोग करें तथा अपने कौशल और ज्ञान के माध्यम से नए नवाचार विकसित करें। उन्होंने उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक मजबूती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानसिकता और सोच का भी विषय है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने अंदर आत्मविश्वास विकसित करें और चुनौतियों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहें।
विशिष्ट अतिथि श्री दीपक जैन ने अपने संबोधन में उद्यमिता, नेतृत्व और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए विद्यार्थियों को तैयार रहने का आह्वान किया। अपने प्रभावशाली संबोधन में उन्होंने कहा कि आज का युग तेजी से बदलती वैश्विक प्रतिस्पर्धा का है, जहाँ केवल पारंपरिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि नवाचार, उद्यमिता और नेतृत्व क्षमता भी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक कौशलों जैसे कि संवाद क्षमता, समस्या समाधान और तकनीकी ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे निरंतर सीखते रहें और अपने कौशल को समय के साथ अपडेट करते रहें।
विशिष्ट अतिथि श्री रवि गुप्ता ने छात्रों को उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकसित करने पर बल दिया। उन्होंने यह भी जोर दिया कि युवा पीढ़ी को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट कार्य और उद्योग से जुड़ी गतिविधियों में भागीदारी से छात्रों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है, जो उनके करियर निर्माण में सहायक होता है। अंतरराष्ट्रीय वक्ता प्रोफेसर मोहन कोल्हे ने ऑनलाइन माध्यम से अपने संबोधन में बताया कि वैश्विक परिप्रेक्ष्य में सोचते हुए स्थानीय स्तर पर कार्य करना आज की आवश्यकता है। नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास के माध्यम से विद्यार्थी न केवल अपने करियर को नई दिशा दे सकते हैं, बल्कि देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
कुलपति प्रोफेसर असीम मिगलानी ने विद्यार्थियों व शोधार्थियों को आत्मनिर्भर, समृद्ध एवं सतत भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने सभी युवा विद्यार्थियों व शोधार्थियों से आह्वान किया कि वे नए विचार प्रस्तुत करें, नीतिगत सुझावों पर चिंतन करें तथा व्यावहारिक समाधान विकसित करने की दिशा में कार्य करें, जिससे राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया को गति मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि सतत विकास को ध्यान में रखते हुए विद्यार्थियों को पर्यावरण, संसाधनों के संतुलित उपयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना के साथ कार्य करने की आवश्यकता है।
कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने विद्यार्थियों को समसामयिक और राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर गंभीर चिंतन एवं सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। उन्होंने आर्थिक विकास, महिला उद्यमिता, सामाजिक समानता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक चर्चा की, जो देश के समग्र और संतुलित विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे इन विषयों को केवल अकादमिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप में समझें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने हेतु योगदान दें। कुलसचिव ने मुख्य वक्ता, विशिष्ट अतिथियों एवं विद्वानों का हृदय से आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम की संयोजक एवं कौशल संवर्धन और व्यावसायिक विकास केंद्र की निदेशक प्रोफेसर रितु बजाज ने विद्यार्थियों को समय प्रबंधन, कौशल विकास और आत्मनिर्भर बनने पर विशेष जोर दिया। सम्मेलन में सभी प्रतिभागियों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन माध्यम से शोध पत्रों का प्रस्तुतीकरण दिया। इस अवसर पर श्री सतीश जी के द्वारा स्वदेशी विषय पर लिखी पुस्तक का विमोचन भी किया गया, इसके बारे में प्रोफेसर सुनीता भर्तृवाल ने संक्षेप में बताया।
स्वदेशी शोध संस्थान की तरफ से एक प्रदर्शनी भी आयोजित की गई जिसमें विभिन्न स्वदेशी उत्पादों को रखा गया। इसके अतिरिक्त औद्योगिक निरीक्षण विषय को सार्थक करने के लिए आइसर कंपनी के विभिन्न मोटर उत्पादों को विद्यार्थियों की प्रदर्शनी हेतु रखा गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के सहसंयोजक प्रोफेसर अदिति शर्मा, प्रोफेसर रविंद्र, आयोजन सचिव डॉ. ममता अग्रवाल एवं डॉ. भारती, प्रोफेसर रणबीर सिंह, सहित सभी समिति संयोजक, सदस्य एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।